
हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल प्रदेश स्टेट बार काउंसिल सदस्य एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिला हमीरपुर के प्रवक्ता रोहित शर्मा एडवोकेट ने कहा कि जिस प्रकार अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी की लोकसभा सदस्यता रद्द की गई बे उसकी घोर शब्दों में निंदा करते हैं ।उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल राहुल गांधी की हाल में की गई भारत जोड़ो यात्रा जिसे पूरे देश में अपार समर्थन मिला से खुद को असहज महसूस कर रहा है । राहुल गांधी पिछले कई वर्षों से लगातार केंद्र सरकार के तुगलकी फैसलों के खिलाफ भारतीयों के हक की सच्ची लड़ाई लड़ रहे हैं तथा उन्होंने सत्ताधारी दल के करीबी कुछ कारोबारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार को लोकसभा के भीतर एवं बाहर बार-बार उजागर किया है। जिसके चलते केंद्र सरकार राहुल गांधी की आवाज को दबाने के लिए गैर कानूनी निर्णय लेने से भी परहेज नहीं कर रही है। लोकसभा सचिवालय की ओर से माननीय सूरत कोर्ट के फैसले के चंद घंटों के भीतर ही उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई, जो कि ना तो कानून संवत है ना ही संवैधानिक । इस फैसले में संविधान के अनुच्छेद 103 का उल्लंघन किया गया है। क्योंकि अनुच्छेद 103 के तहत लोकसभा सदस्यता रद्द करने के ऊपर फैसला लेने का अधिकार केवल महामहिम राष्ट्रपति को ही है तथा अनुच्छेद 103 के खंड 2 में भी यह स्पष्ट लिखा है कि महामहिम राष्ट्रपति लोकसभा सदस्य को अयोग्य घोषित करने से पहले चुनाव आयोग से परामर्श करेंगे फिर फैसला लेंगे। माननीय लोकसभा स्पीकर को सिर्फ दल बदल विरोधी कानून के तहत ही किसी सदस्य की सदस्यता रद्द करने की शक्ति निहित है रोहित शर्मा एडवोकेट ने कहा कि वे मानहानि के मामले में माननीय सूरत कोर्ट के फैसले से असहमति रखते हैं क्योंकि कानूनी रूप से राहुल गांधी पर कोई भी मानहानि का मामला नहीं बनता और राहुल गांधी के वक्तव्य को माननीय न्यायालय ने सही ढंग से अवलोकन नहीं किया है।







