
संवाददाता, दिल्ली
हिंदू धर्म ग्रंथों में आपने समुद्र मंथन और वासुकी नाग के बारे में पढ़ा होगा. अभी तक साइंस इसे एक कल्पना मानती रही है, लेकिन आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें एक ऐसे सांप का जीवाश्म मिला है, जिसे धरती का सबसे बड़ा सांप कहा जा सकता है. ये करीब 47 मिलियन वर्ष पहले मध्य इओसीन काल के दौरान वर्तमान गुजरात के क्षेत्र में रहता था. सांप की इस संरचना को वैज्ञानिकों ने वासुकी इंडिकस का नाम दिया है. शुरू में इसे विशाल मगरमच्छ के अवशेष माना जा रहा था. मगर, हाल ही में हुई एक स्टडी में पता चला है कि ये दुनिया के सबसे बड़े सांपों में से एक के जीवाश्म हैं. अब सवाल उठ रहा है, क्या वैज्ञानिकों ने वासुकी नाग के अवशेष ढूंढ लिए हैं? दरअसल, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर सुनील बाजपेयी और पोस्ट-डॉक्टरल फेलो देबजीत दत्ता की उल्लेखनीय खोज में सांप की एक प्राचीन प्रजाति का अनावरण किया गया है, जिसे पृथ्वी पर अब तक पाया जाने वाला सबसे बड़े सांप माना गया है. दावा किया जा रहा है कि इस सांप का संबंध विलुप्त हो चुके मैडसोइडे सांप के परिवार से था.
ये भारत के एक अद्वितीय सर्प वंश का प्रतिनिधित्व करता था. यह अभूतपूर्व खोज संस्थान की महत्वपूर्ण जीवाश्म खोजों की बढ़ती सूची में शामिल हो गई है. प्रोफेसर सुनील बाजपेयी और देबजीत दत्ता ने बताया कि वासुकी इंडिकस की खोज सचमुच आश्चर्यजनक है. एक ऐसे सांप की कल्पना करें जो एक स्कूल बस जितना लंबा हो सकता है, जिसकी लंबाई 11 से 15 मीटर के बीच हो सकती है. इस प्राचीन विशालकाय सांप के जीवाश्म गुजरात के कच्छ में पनांद्रो लिग्नाइट खदान में पाए गए थे. इन जीवाश्मों में से 27 कशेरुक (रीढ़) असाधारण रूप से अच्छी तरह से संरक्षित थे, जिनमें से कुछ जिग्सॉ पहेली के टुकड़ों की तरह जुड़े हुए पाए गए. वहीं, जब वैज्ञानिकों ने इन कशेरुकाओं (रीढ़) को देखा तो उन्हें उनके आकार और आकृति के बारे में एक दिलचस्प चीज़ नज़र आई.
उनका सुझाव है कि वासुकी इंडिकस का शरीर चौड़ा और बेलनाकार था, जो एक मजबूत और शक्तिशाली निर्माण की ओर इशारा करता है. वासुकी इंडिकस को लेकर वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका आकार टाइटनोबोआ सांप के बराबर है. टाइटनोबोआ सांप को पृथ्वी का अबतक का सबसे लंबा सांप माना जाता है. बता दें कि टाइटनोबोआ सांप को मॉन्सटर (दैत्य) स्नेक भी कहा जाता है. प्रोफेसर सुनील बाजपेयी का कहना है कि माइथोलॉजी में भगवान शिव के गर्दन में लिपटे सांप वासुकी के नाम से प्रेरित होकर नाम रखा है. दोनों सांपों का आपस में संबंध नहीं है. सांप की लंबाई 11-15 मीटर के बीच हो सकती है. इस प्रजाति के सांप के अवशेष नॉर्थ अफ्रीका में मिलते हैं. उन्होंने कहा कि आज लोग इसे समुद्र मंथन और वासुकी नाग से जोड़कर देख रहे हैं. आस्था का सम्मान है लेकिन प्रामाणिकता के आधार पर दोनों में संबंध नहीं है. सिर्फ नाम रखने के लिए वासुकी नाम दिया गया है. फॉसिल्स की स्टडी करने में 6 महीने का समय लगा है. यह सांप अन्य सांपों से अलग है.







