
शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष पर समरहिल चौक में यूनिटी चैन के माध्यम से महिला दिवस को मनाया हर वर्ष महिला दिवस के उपलक्ष पर भिन्न-भिन्न गतिविधियां विश्वविद्यालय के अंदर करवाती आई है एसएफआई ने विश्वविद्यालय में भिन्न-भिन्न गतिविधियों के माध्यम से महिला दिवस को मनाया जिसके अंदर पहले दिन यानी 6 तारीख को एसएफआई ने विश्वविद्यालय पिंक बैटल पर विश्वविद्यालय की गर्ल्स साथियों द्वारा पोस्टर राइटिंग करवाई गई और उसी के साथ विश्वविद्यालय में एक सेमिनार का आयोजन करवाया गया जिसमें एडवोकेट भारती द्वारा बड़े ही विस्तारपूर्वक तरीके से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यह इतिहास और इस समाज में इस महिला दिवस की भूमिका को सरल शब्दों में समझाया गया इसे अगले दिन यानि 7 तारीख को सुबह विश्वविद्यालय गेट पर पर्चा वितरण किया गया और उसके बाद कन्या छात्रावासों के साथ लगती दीवारों पर वॉल पेंटिंग की गई जिसमें छात्रावासों की बहुत सी छात्राओं द्वारा अपनी भागीदारी सुनिश्चित की गई और उसके बाद साईं काल के समय विश्वविद्यालय इकाई द्वारा समरहिल के लाल चौक पर एक धरना प्रदर्शन किया गया जिस धन्य प्रदर्शन में हिमाचल प्रदेश गर्ल सब कमेटी कन्वीनर सरिता रामद्वारा बात रखी गई उन्होंने बड़े ही विस्तार पूर्वक तरीके से क्या महत्व आज के समय में इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का है उसके ऊपर बात रखी उन्होंने बताया कि आज के समय में जिस तरह सिर्फ 2 या 3 दिन इस महिला दिवस को हमारे देश के अंदर मनाया जाता है उसे बेहतर यह है कि पूरे वर्ष जिस प्रकार से हमारे देश के अंदर महिलाओं का उत्पीड़न किया जाता है उन्हें शारीरिक तौर पर मानसिक तौर पर और घरेलू हिंसा के नाम पर इस पुरुषवादी समाज द्वारा प्रताड़ित किया जाता है उस पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस समाज को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं द्वारा अपनी भागीदारी सुनिश्चित की गई है चाहे वह रानी लक्ष्मी लक्ष्मी बाई हो सावित्रीबाई फुले हो या कल्पना चावला हो जिन्होंने धरती पर ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष में भी महिलाओं को समान दिलाया है परंतु आज की मोदी सरकार द्वारा उनको सम्मान दिलाने की बजाय उन को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है उनके साथ कार्य क्षेत्रों में भेदभाव किया जाता है उनके साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है जिसके चलते महिलाएं लगातार इस पुरुष प्रधान देश में पुरुष का शिकार बनती आ रही है विश्वविद्यालय मैं भी छात्राओं का राइट टू फ्रीडम खत्म कर दिया जा रहा है उनको लाइब्रेरी से 8:00 बजे निकाल दिया जा रहा है और हॉस्टल में बंद कर दिया जाता है लड़कियों के लिए कॉमन रूम की सुविधाएं नहीं है एक तरफ सरकार को लड़कियों के लिए अनेक सुविधाएं मुहैया करवाने की जरूरत है परंतु वहीं दूसरी ओर उनके सेनेटरी पैड पर भी जीएसटी लगाकर सरकार उनकी सेफ्टी से भी हाथ पीछे हटा रही है एक और सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है वहीं दूसरी ओर होलिका दहन करके इस समाज को क्या मैसेज देना चाहती है आज एसएफआई द्वारा यूनिटी चेन के माध्यम से इस समाज में महिला और पुरुष को बराबरी समझकर समाज को आगे की ओर ले जाने का संदेश देती है।
एचएसआई आने वाले समय में इन सभी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय में आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और जितनी भी मांगे इस मांग पत्र में है उन सभी मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष करेगी और प्रदेश सरकार से भी हमें उम्मीद करते हैं की कि जितनी भी यह मूलभूत सुविधाएं जिनकी जरूरत आज के समय में शिक्षण संस्थानों के अंदर वहां पर पड़ रही लड़कियों को है वह सरकार द्वारा मुहैया करवाई जानी चाहिए यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो हम सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए सरकार को इन मांगों को मारने के लिए मजबूर करेंगे