
राष्ट्रीय मुद्दों को जनता के बीच ले जाने में कांग्रेस नेता कर रहे परहेज
विशाल राणा/हमीरपुर
लोकसभा चुनाव सिर पर हैं लेकिन हमीरपुर में इस बार लगता है कि कांग्रेस के लिए ये मात्र उप- चुनाव बन के ही सीमित रह गया है। कांग्रेस से बीजेपी में गए नेता और कांग्रेस के नेता आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझ कर रह गए हैं। अपनी पार्टी में इतनी बड़ी फूट के बावजूद भी कांग्रेस ने अभी तक सबक नही लिया, कांग्रेस के स्थानीय नेता मात्र अपने अपने क्षेत्रों जहां उपचुनाव होने हैं वहां कांग्रेस छोड़ कर गए नेताओं को कोस रहे हैं और पार्टी टिकट के जुगाड में लगे हुऐ हैं। ऐसे में विकास, रोजगार समेत तमाम मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं। हर टिकटार्थी एक-दूसरे की खामिया निकलने में लगे हैं, और मुख्य मुद्दों को छोड़ व्यक्तिगत आक्षेप लगा अपनी कमीज जायदा सफेद होने की होड़ में नेता नजर आ रहे हैं, हालांकि हमीरपुर जिला में विधानसभा के उपचुनावों के लिए कांग्रेस ने अभी अपने प्रत्याशी घोषित नही किए हैं , उनकी घोषणा के बाद व्यक्तिगत हमले और भी तेज होने की संभावना है।
बरहाल हमीरपुर जिला में इसे भाजपा की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है कि कांग्रेस अपना ध्यान सिर्फ और सिर्फ जिला में होने जा रहे दो विधानसभा और तीसरे हमीरपुर सदर जिसकी भी संभावना है, के चुनावों पर ही केंद्रित कर रही है, कांग्रेस की और से ये आम चुनाव सिर्फ उपचुनाव होते दिखाई दे रहे है। कांग्रेस की सभाओं और बैठकों में राष्ट्रीय मुद्दे गौण दिखाई दे रहे। कांग्रेस के कुछ प्रवक्ता केंद्र की सरकार के खिलाफ सिर्फ एक आध लाइन बोल औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे है।
देश के सबसे शिक्षित जिला हमीरपुर की आम जनता का कहना है कि हर चुनाव में पहले राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती थी, केंद्र सरकार का प्रदर्शन और स्थानीय सांसद के कामकाज का आंकलन होता था पर इस बार अलग हो नजारा देखे को मिल रहा। लोगों का कहना है कि चुनाव में राजनीतिक दलों को पेयजल, स्वास्थ्य, सडक़, शिक्षा जैसी मूलभूत चीजों को प्राथमिकता के रूप में लेना चाहिए।
पूर्व शिक्षक के बलवंत सिंह कंवर ने कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव में मुद्दों को भुला दिया गया है। विकास जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने चाहिए। देश का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। इसके साथ ही लोगों को रोजगार मिले। रोजगार के लिए ठोस नीति व योजना बननी चाहिए। यदि लोगों को रोजगार सुलभ होगा तो गरीबी खत्म हो जाएगी।
स्थानीय मोबाइल व्यापारी विजय वर्मा ने कहा कि केंद्र द्वारा एफडीआइ, ई-काॅमर्स तथा माॅडर्न ट्रेड को बढ़ावा देने से देश में डिस्ट्रीब्यूटर एवं ट्रेडर्स का कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार को बड़े-बड़े केंद्रीय प्रोजेक्ट जैसे सड़क निर्माण, स्वदेशी आधारभूत संरचना, मेडिकल खोज एवं अस्पताल तथा शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी निवेश को इजाजत देनी चाहिए। जबकि केंद्र सरकार द्वारा विदेश के उद्योगपतियों को इन बड़े प्रोजेक्टों में निवेश के बजाय अन्य छोटे-छोटे प्रोजेक्ट में निवेश की इजाजत धड़ल्ले से दी जा रही है। केंद्र की इस नीति ने किराना ग्राॅसरी व अन्य छोटे कारोबार को चौपट कर दिया है।
पूर्व कैप्टन सुरिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि अग्निवीर जैसी योजना का बंद किया जाना चाहिए ताकि हमारे जवान सम्मान के साथ अपनी ड्यूटी कर सकें। उन्होंने कहा कि सेना की नौकरी हिमाचल युवाओं के देश के प्रति जज्बे के साथ साथ रोजगार का साधन भी है। उन्होंने कहा कि सेना में हिमाचल रेजिमेंट बनाई जाए।
स्थानीय गृहणी मीनाक्षी ने बताया रसोई के रोजमर्रा का सामान बहुत महंगा है। जीएसटी के कारण दूध, दही, पनीर और सामान महंगा हुआ है। रसोई गैस के दाम चरम पर हैं और पेट्रोल और डीजल के महंगा होने के कारण घरेलू सामान महंगा हो रहा है।
इसके इलावा कई केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र के जनता से जुड़े मुद्दे हैं, जो इन चुनावों में विपक्ष के द्वारा सार्वजनिक मंचों पर नही उठाए जा रहे। अभी चुनावों में 2 महीने का समय है अब ये देखना बाकी है कि कांग्रेस किस लाइन पर ये चुनाव लडेगी। क्या वो सशक्त विपक्ष की भूमिका अदा कर केंद्र की एनडीए सरकार और लोकसभा सांसदों को कार्यप्रणाली को मुद्दा बनाएगी या ये आम चुनाव कांग्रेस सिर्फ उप चुनावों पर ध्यान देने तक ही सीमित रखेगी और अपनी प्रदेश सरकार पर आए संकट को दूर करने के प्रयास में लगी रहेगी।