रक्षाबंधन बांधने का शुभ मुहूर्त वे रक्षा सूत्र बनाने की विधि पंडित सुरेश गौतम

विवेकानंद हमीरपुर :- पंडित सुरेश गौतम का कहना हे कि
पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त गुरुवार के दिन 10:38 से शुरू होकर उसके अगले दिन 12 अगस्त शुक्रवार को सुबह 7:05 तक रहेगी। अतः इस बार रक्षाबंधन का त्यौहार 11 अगस्त 2022 गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा
(अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 से 12:29 या विजय मुहूर्त 2:14 से 3:07 तक।

यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ।
रक्षा सूत्र बनाने की विधि
इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है –
(१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने ।
इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
इन पांच वस्तुओं का महत्त्व
(१) दूर्वा – जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत – हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर – केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन – चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने – सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई राखी को बहनें अपने भाई को शुभ संकल्प करके बांधे ।

रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ।

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