
विवेक शर्मा हमीरपुर : – खंड स्तरीय सुपोषण योजना कार्य बल की अध्यक्षता करते हुए उप मंडल अधिकारी (नागरिक) डॉक्टर हरीश गज्जू ने बताया कि भारत में विश्व के सर्वाधिक बच्चे निवास करते हैं। विश्व में निवास करने वाला प्रत्येक पांचवा बच्चा भारतीय है। दुर्भाग्यवश भारत सर्वाधिक कुपोषित बच्चों का घर भी है। कल्याणकारी और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में यह अवस्था हमारे आदर्शों और इच्छाओं की अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और वचनबद्धता जैसे कि सहस्राब्दी विकास लक्ष्य, टिकाऊ विकास लक्ष्य(2000), विश्व स्वास्थ्य सभा के प्रस्ताव हमें इस दिशा में त्वरित और समन्वित प्रयास के लिए वाध्य एवं प्रेरित करते हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्र के रूप में इसी वचनबद्धता में अग्रणी भूमिका अदा करते हुए कुपोषण एवं और रक्त अल्पता (एनीमिया) पर निर्णायक प्रहार करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री बाल सुपोषण योजना की शुरुआत की है। इष्टतम स्वास्थ्य देखभाल, उच्चतम पोषण और उपयुक्त वातावरण पर आधारित यह योजना माताओं, देखभाल कर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था करती है। उन्होंने बताया कि सप्त स्तम्भों पर आधारित यह योजना अतिरिक्त देखभाल, अतिरिक्त पोषण और उचित दशाओं का निर्माण करती है। इसके अतिरिक्त देखभाल के रूप में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर आधारित नवजात और शिशु देखभाल, बाल स्वास्थ्य क्लीनिक और सुरक्षित मातृत्व आश्वासन की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त पोषण के रूप में अतिरिक्त आहार में प्राणी आधारित(एनीमल बेस्ड) उच्च श्रेणी के प्रोटीन सामान्य लाभार्थियों को 8 रूपए प्रतिदिन की दर से सप्ताह में दो बार और कुपोषित बच्चों तथा खतरे वाली गर्भवती महिलाओं को 12रूपए प्रतिदिन की दर से सप्ताह के 6 दिन उपलब्ध कराई जाएगी। जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक निगरानी और समीक्षा व्यवस्था उच्च प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 9 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे, किशोरियों और माताओं के रक्त की जांच डिजिटल हिमोग्लोबीनो मीटर के माध्यम से करते हुए उपचार की भी व्यवस्था की गई है। कुछ खतरे वाली गर्भवती माताओं की देखभाल के लिए देखभाल करने वाले को ॥ड्ढ १०द्व/स्ररु होने पर 500 रूपए प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। जन्म के समय कम वजनी बच्चों के भार में अपेक्षित वृद्धि पर 200 रूपए प्रति किलोग्राम ( पांच किलोग्राम विधि तक) दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सामान्य बच्चों के वजन में दोगुनी एवं तीन गुनी वृद्धि होने पर भी कुछ शर्तों के साथ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि योजना के हस्तक्षेपों के परिणाम स्वरुप बाल लिंगानुपात में अपेक्षित सुधार हो रहे हैं। गत वर्ष जन्म के समय अंकित किए गए 1042 के बाल लिंगानुपात की तुलना में इस वर्ष यह 1094 तक पहुंच गया है। बेटी है अनमोल, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री शगुन योजना, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृत्व सहयोग योजना और सशक्त महिला योजना जैसी महत्वकांक्षी योजनाएं बेटियों एवं महिलाओं के विकास के लिए समुचित वातावरण उत्पन्न करने में सफल हुई हैं।
बैठक में खंड विकास अधिकारी निशांत शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी कुलदीप चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजकुमार, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार और विषय वाद विशेषज्ञ राजेश कुमार और उद्यान विकास अधिकारी निधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।







